शनिवार, 7 जनवरी 2012

शिक्षा और भूख में चुनाव ...

एक बहुत ही आम सा सवाल करना चाहती हूँ | की आप ये बताये , यदि किसी गरीब को शिक्षा और भूख में चुनाव करना है ,तो वो क्या चुनेगा ?? जाहिर है भूख यानि जीवन | अब यह बात सिर्फ भूख कह देने से तो खत्म नहीं होती | हमे यह भी सोचना होगा की पढ़ने-लिखने की उम्र में अपनी हाथो से झूटे बर्तन धोते बच्चे , पत्थरों का बोज उठाते बच्चे , जानवरों की तरह मेहनत करके सिर्फ पेट भरते बच्चे | क्या बस इतने से ही संतुष्ट रहे की वे अभी जीवित है , मरे नहीं है | और ये भी वे  मान  ले, की अगर उन्होंने मजदूरी का अभिशाप ना अपनाया होता तो वे कब के मारे जाते | 


समाज में एक तरफ जहाँ अमीर का बच्चा चोकलेट की डिमांड करता है , तो उसका पिता उसे दिला देता है | और उस बच्चे का, उसी चोकलेट से पेट भर जाता है | और वो सिर्फ चोकलेट ही लेता है , चावल खा नहीं पाता है | पर देखिये कितना अंतर है , गरीब के बच्चो में जब गरीब बच्चा अपनी माँ से कहता है की माँ मेरा पेट आधा भरा है थोड़ा और चावल देदे | उस पर उसका बाप जोरो से चिलाता है , उसे पिटता है, कहता है- लालची, कई गालियाँ देता है , उसे स्वार्थी बताता है |


मेरा ब्लॉग लिखने का मात्र ये उद्देश्य है , की लोग देश में शिक्षा के महत्त्व को निचले स्तर तक पहुँचाने का प्रयास करे | जो आज कोई गरीब बच्चा , कुछ पढ़ पायेगा तो ही तो आगे बढ़ पायेगा और साफ़ करेगा गरीबी का दाग अपने जमीर से और वो भी सभ्य समाज में खुद को स्थापित कर पायेगा | मैं जानती हूँ की सिर्फ शिक्षा से जीवन सफल नहीं बन जायेगा पर कल का गरीब बच्चा कुछ पढ़कर ही तो दुनिया का सामना कर पायेगा | 

5 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा लिली जी बहुत सुन्दर विचार

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  2. मैं २००५ में एक मणिपुर के युवा से दिल्ली में बात किया था ! वो मेरे से हिंदी में बात नहीं करपया ! सिर्फ अंग्रेजी ! मैंने सोचा ये किया होगया ! हमारे अखंड भारत को भावनात्मक जोरने वाली भाषा ही तो है ! और वो भाषा सिर्फ हिंदी है ! अब लगता है की हमारा बिखंड भारत अखंड होसकता है ! हमारा सपना पूरा होगा ! जय हिंद जय भारत जय हिंदी भाषी

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