गुरुवार, 12 जनवरी 2012

भारत के गाँव है , ऊर्जा संकट से बचाव


भारत एक कृषि प्रधान देश है | भारत की 80 प्रतिशत जनता गाँव में निवास करती है , पूरा विश्व ऊर्जा के संकट से भयभित है , तो मैं इस बदलते घटनाक्रम में ' भारत की वर्तमान स्थिति पर कुछ कहना चाहती हूँ ' | हमारा भारत जनसंख्या के बोज में दबा जा रहा है | एक आशंका जताई जाती है की अगले 65 वर्षो में भारत देश का समस्त ऊर्जा स्त्रोत समाप्त हो सकता है | एक अनुमान है की सन 2025 तक विश्व की जनसंख्या 8 अरब तक हो जाएगी, जबकि वर्तमान में हमारी जनसंख्या 1.20 अरब हो चुकी है |

आजादी के बाद औद्योगिक विकास ने जो गति पकड़ी है,  जिसके कारण उधोगों के लिए ऊर्जा की खपत में वृद्धि हुई | कुछ उधोग तो ऐसे स्थापित हुए है, जिनमें स्वभावतः ही आधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है | जैसे मशीनरी एवं इंजीनियरिंग उधोग लोहा एवं इस्पात उधोग | यूँ तो भारत ऊर्जा के नये विकल्पों को विकसित नहीं कर पाया है और वर्तमान उपस्थित विकल्प जैसे कोयला और पेट्रोल समाप्त होने की स्तिथि में आ गये है | जल विधुत के लक्ष्य को साधने में और अणुशक्ति के विकास में देश पिछड़ता जा रहा है | जिससें देश में ऊर्जा संकट की स्तिथि निर्मित होती जा रही है |

ऐसे में भारत को ऊर्जा संकट से जो कोई बचा सकता है, वो है भारत के गाँव | भारत की जलवायु उसे सौर ऊर्जा ,पवन ऊर्जा ,जैव ऊर्जा ,लहर ऊर्जा ,भूतापीय ऊर्जा आदि ऊर्जा उत्पन्न करने के प्रयाप्त अवसर देती है | कृषि प्रधान देश होने के कारण भारत में पशुओं की संख्या बहुत आधिक है और हो सकता है की भविष्य में गोबर गैस संयंत्र ही हमारी ऊर्जा की अधिकतरपूर्ति करे |

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छा विचार लिली जी .

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  2. Bahut achhi baat kahi hai aapne is baat ko sabhi ko samjhna hoga ki urja ka kitna mahawa hai bilkul sahi hai ki ye khatma ho jayegi agar isi tarah ham iska durupyog kare hame Villages ko bachana hoga kyoki waha se hame bahot urja k srot milte hai...... nice work

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  3. Bahut achhi baat kahi hai
    aapne DD.Please add me in your bloge

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  4. pr bharat sarkar ko is se koi lena-dena nahi,pravasi bhartiya sammelan mey.Jaipur ke ander Gujrat ke mukhamantri Shri Narendra Modi ne is bat ko ujagar kiya hai.

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